अल्ज़ाइमर :-इसे बूढ़ों की बिमारी भी कहा जाता है

अल्ज़ाइमर रोग  मानसिक कार्यों को हानि पहुंचाता है, जिससे हमारी बौद्धिक क्षमता बेहद कम हो जाती है। जिस कारण हमारे रोजाना के दिनचर्या वाले काम भी हमसे नहीं हो पाता। अल्जाइमर रोग हमारी मानसिक और बौद्धिक क्षमता को इतना कमजोर कर देता है कि इससे हम अपने दिनचर्या को भी ठीक तरह से नहीं कर पाते हैं। इस बीमारी में हम अपने घर का एड्रेस, सुबह क्या खाया था, घर से तो निकल गए लेकिन जाना कहां है, यह भी याद नहीं। यहां तक कि लोग अपने घर का एड्रेस और अपनों को भी नहीं पहचान पाते हैं। अल्जाइमर भी एक डिमेंशिया है।  डिमेंशिया का मतलब है मेमोरी लॉस का एक प्रकार। डिमेंशिया दो प्रकार के होते हैं एक वो जिसका इलाज संभव है, दूसरा वह जिसका इलाज नहीं है और अल्जाइमर दूसरे वाले कैटेगरी में आता है। इस बीमारी में जो कोशिकाएं हमारे मेमोरी को कंट्रोल करती है, वही सूखने लगती हैं। जो भूलने की बिमारी के रूप में हमारे सामने आती है,जिसे रिकवर करना मुश्किल हो जाता है क्योंकि आज तक अल्जाइमर का कोई दवाई मार्केट में उपलब्ध नहीं है। हालांकि इसके वैक्सीन पर काम चल रहा है। लेकिन इसकी दवाई मार्केट में आने में वक्त लगेगा।

अल्ज़ाइमर  के लक्षण

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अल्जाइमर को वैसे तो बुजुर्गों की बीमारी कहा जाता है, लेकिन यह आजकल युवाओं में भी देखा जा रहा है। हालांकि यह बिमारी लोगों को 40 या 50 के उम्र के आसपास शुरू हो सकता है। लेकिन यह ज्यादातर  60-65 उम्र के लोगों को होता है। अगर इस उम्र में आप भूल जाते हैं, आपको लगता है कि आपका दिमाग पहले जैसा काम नहीं करता है, तो एक बार मनोचिकित्सक से जरूर मिलें। ताकि आप अगर अल्जाइमर के शुरुआत में है तो डॉक्टर आपको उसी के अनुसार दवाई दे सके जिससे यह बीमारी आगे ना बढ़ पाए और वहीं पर रुक जाए। अल्जाइमर में व्यक्ति के सोचने की क्षमता में गिरावट आती है। यादाश्त में समस्याएं, भटकाव, उलझन और  एक बार घर से चले गए तो दोबारा घर आने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। हम अपने घर का रास्ता भूल जाते हैं, व्यवहार में परिवर्तन हर छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन होने लगता है।  बोलने में ,खाना निगलने में या चलने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

अल्ज़ाइमर का इलाज

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अगर आप में अल्जाइमर के लक्षण दिखे तो तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएं, हालांकि इस बीमारी का ऐसे तो कोई इलाज नहीं है लेकिन अगर शुरुआत में ही इस बीमारी को पकड़ लिया जाए तो, डॉक्टर इसके आपको दवा दे सकता है, जिससे इसके जोखिम को कम किया जा सके। इसके अलावा डॉक्टर आपको कई प्रकार के उपाय बताते हैं जिससे आपको दिमाग यूज करने वाले काम दिया जाता है। इस ट्रीटमेंट में सबसे पहले मरीज को अधिक से अधिक दिमाग का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। सुडोकू, क्रॉसवर्ड, पजल खेलें।जिससे दिमाग एक्टिवटे रहे आजकल बहुत सारी वेबसाइटें भी हैं, जिस पर रजिस्टर करके आप सुडोकू, पजल आदि गेम्स खेल सकते हैं। ये वेबसाइट रोजाना आपको पजल,सुडोकु आदि सोल्व करने के लिए देती हैं। इससे आपका दिमाग एक्टिवेट रहे और आपके दिमाग पर अल्जाइमर का जोखिम कम हो। जिस तरह शरीर के लिए फिजियोथेरेपी होती है, उसी तरह दिमाग के लिए ये गेम मेंटल पीओपी का काम करते हैं।  अल्जाइमर से बचने के लिए आप जितना ज्यादा नींद लेंगे यह आपके दिमाग के लिए उतना ही आरामदायक होगा।सुबह जब आप सो कर उठेंगे तो आपका दिमाग एकदम तरोताजा रहेगा और आपके दिमाग में तनाव बिल्कुल भी नहीं होगी। एक शोध के मुताबिक समय पर पूरी नींद ना ले पाना स्वास्थ्य में गिरावट का एक बड़ा संकेत हो सकता है। रोजाना कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज करें, जिससे हमारा शरीर के साथ-साथ मानसिक तौर पर एक्टिवेट रहने में और तनाव दूर भगाने में सहायक होते हैं।

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