क्या ये दवा है कोरोना का संजीवनी ?

कोरोना एक ऐसी जानलेवा वायरस है जिससे दुनिया भर के लगभग सभी देश परेशान हैं। दुनिया भर के वैज्ञानिक भी कोरोनावायरस के इलाज के लिए दवाई या वैक्सीन ढूंढने में लगे हैं। लेकिन अभी तक इसका इलाज नहीं मिल पाया है। इन सभी के बीच कैसी दवा है जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा है वह है हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन। फ्रांस, चीन, इंडिया,अमेरिका और अधिकार देशों में ही इस दवा से कोरोना का इलाज चल रहा है।  इससे मरीज तेजी से ठीक भी हो रहे हैं। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पहली बार चर्चा में तब आया जब अमेरिका ने इसे भारत से देने की मांग करने लगा। हालाँकि पक्के तौर पर कोरोना का कोई इलाज नहीं है। ऐसे समय में ये दवा पूरी दुनियां में कोरोना के इलाज के रूप में जिंदगी की एक नई किरण बनके सबके सामने आई है। यह दवा भारत में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। यही कारण है की दुनिया के बहुत से देश इसकी मांग भारत से कर रहे हैं।37 % डॉक्टरों ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को कोरोना के इलाज में अबतक जो भी दवा बाजार में मौजूद है उनमे इसे सबसे बेहतर माना है।

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क्या है हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवाई मुख्य रूप से मलेरिया के मरीजों को दिया जाता है। इसके अलावा इसका यूज रिमिटेड, आर्थराइटिस और लिपस में भी किया जाता है। चूँकि हमारे देश में मलेरिया का प्रकोप ज्यादा है, इसलिए यहां यह दवा का प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। अमेरिका जैसे विकसित देशों में मलेरिया जैसी बीमारी बहुत कम है। इसलिए अमेरिका में यह दवा उतनी मात्रा में नहीं है। इसलिए अमेरिका भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की मांग कर रहा है। वैसे इस दवा को फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन में कोविड-19 के लिए नहीं बल्कि मलेरिया, आर्थराइटिस के इलाज के लिए अप्रोच किया है।दुनिया में बहुत से अस्पताल कोरोना वायरस के दवा या वेक्सीन ना होने के कारण मरीजों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दे रहे हैं। लेकिन दुनिया भर में इसके स्टडीज शुरू हो चुके हैं कि यह दवा कोरोना वायरस पर कितना कारगर है।

hydroxychloroquine or HCQ drug in colourful letters on table used for malaria

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हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन में ऐसा क्या है जो इसे कोरोना के वेक्सीन के रूप में दिया जा रहा है

एक लैब स्टडी के अनुसार हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन में मौजूद तत्व वायरस को शरीर में मौजूद सेल में प्रवेश करने से रोकते हैं। यूरोप,चीन और अमेरिका के डॉक्टर कोरोना के मरीजों को यह दवा दे सकते हैं। इसकी उभें अनुमति मिल चुकी है। चीन और फ्रांस के डॉक्टर की रिपोर्ट के अनुसार हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन के साथ मिलकर कोरोना के इलाज में बेहतर रिजल्ट देते हैं।कोरोना का मुख्य रूप से कोई वेक्सीन ना होने के कारण बहुत से डॉक्टर इसे दवा के रूप में मरीजों को दे रहे हैं। हालाँकि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल कोविड-19 के हल के तौर पर इस्तमाल किया जा रहा है और वहां पर अच्छा रिजल्ट आया है, लेकिन इसके कई साइड इफेक्ट भी हैं।हार्ट के पेशेंट, आंख से संबंधित लोगों और किडनी से संबंधित लोगों के लिए ये घातक सिद्ध हो सकती है। दवा के इस्तेमाल से उल्टी, दस्त जैसी कई परेशानियां भी हो सकते हैं। इसलिए इस दवा का उपयोग अपने आप करने के बजाए डॉक्टर की राय जरूर लें। किसी और कितनी मात्रा में देना है यह डॉक्टर द्वारा तय किया जाता है।

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मेडिकल स्टडीज क्या कहते हैं

इस दवा को लेकर क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो चूका है। दुनिया के 30 देशों के 6200 डॉक्टरों पर हुए सर्वे में 37 % डॉक्टरों ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को कोरोना वायरस के लिए सबसे प्रभावी दवा बताया है। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना के इलाज में कितना कारगर है इसके लिए फ्रांस में कोरोना के 1061 मरीजों पर लगातार कई दिनों तक इस दवा से इलाज किया और नौवें दिन जब जांच की गई तो 973 मरीज पूरी तरह ठीक पाए गये।इन मरीजों की औसत उम्र 44 साल के आसपास थी।इनमे 492 पुरुष मरीज थे। किसी भी मरीज में कार्डियक का खतरा नहीं पाया गया।रिपोर्ट में ये बात भी सामने आयी इस दवा से मरीज 98 %तक पूरी तरह ठीक हो गए। ये दवा शरीर के रोगप्रतिरोधक क्षमता के के अनुसार काम करती है जिनमे ये क्षमता ज्यादा है उनमे ये बेहतर तरीके से काम करती है। हालाँकि सभी लोगो की राय एक जैसी नहीं है। कई शोधकर्ताओं के मुताबिक बेहद कम लोगों पर की गयी ये रिसर्च इस दवा की उपयोगिता साबित नहीं  करती। चीन और फ़्रांस के डॉक्टर्स के रिपोर्ट्स के मुताबिक हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन एंटीबायोटिक एजिथ्रोमायसिन के साथ मिलकर ही कोरोना के इलाज में बेहतर नतीजे देती है।अमेरिकी राष्ट्रपति भी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा को गेम चेंजर कह चुके हैं।

देश में भी इलाज

भारत में भी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन एजिथ्रोमायसिन के जरिये ही कोरोनावायरस का इलाज हो रहा है। आईसीएमआर ने डॉक्टरों को 11  करोड़ हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमायसिन 25 लाख टैबलेट के आसपास मुहैया कराई है। ये दवाई भी सिर्फ उन्ही मरीजों को दिया जा रहा है जो आईसीयू और वेंटिलेटर पर हैं। उन्हें कितनी मात्रा में देना है इसका डीसीजन भी डॉक्टर ही लेते हैं।कोरोना जैसे लक्षण वाले मरीजों को फिलहाल यह दवा नहीं दी जा रही है।

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