खुले में शौच से पर्यावरण और हमें होने वाले नुकसान !

 

हर साल 19 नवंबर को “वर्ल्ड टॉयलेट डे” यानी “विश्व शौचालय दिवस”के रूप में मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे कारण है लोगों को शौचालय से जुड़े पुरानी सोच को दूर कर शौचालय के बारे में जागरूक करना है।ताकि लोग शौचालय का इस्तेमाल करें और खुले में शौच से परहेज कर अपने और पर्यावरण को भी स्वच्छ बनाए रखने में मदद करें। 2019 में “वर्ल्ड टॉयलेट डे” की थीम है”लिविंग टू नो वन बिहाइंड”  यानी “किसी को भी पीछे नहीं छोड़ना है”। जो टिकाऊ विकास के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में 110 मिलियन से ज्यादा शौचालय बनाए गए और 600 मिलियन से ज्यादा लोगों को इसका सुविधा भी मिला, लेकिन अगर सच्चाई की बात की जाए तो भले ही सरकार ने “स्वच्छ भारत अभियान “के तहत शौचालय का निर्माण करवाया हो, फिर भी गांव में लोग अभी भी इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। कारण गाँव ही नहीं शहरों में भी कई जगह बने शौचालय जिनकी देख रेख और साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है, यहां तक कि इनमें पानी की भी व्यवस्था नहीं है, जिस कारण लोग शौचालय का इस्तेमाल से बचते हैं।

इसे भी जाने :-जाने आपकी पत्नी आपको धोखा दे रही है या नहीं

सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना महिलाओं को करना पड़ता है

गांव में लोग अभी भी शौचालय का इस्तेमाल करना अच्छा नहीं समझते और अपने गांव में या घरों में शौचालय तक नहीं बनवाते। वे सुबह-शाम घूमने के बहाने मैदान में शौच करना ज्यादा बेहतर समझते हैं। पुरानी सोच के कारण गाँव में घर के अंदर शौचालय बनाना बुरा माना जाता है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा महिलाओं को भुगतना पड़ता है। शौच जाने के लिए महिलाओं को या तो सूरज निकलने से पहले या रात के अँधेरे में शौच जानें का इन्तजार करना पड़ता है। ऐसे में अगर  महिलाओं को दिन में शौच जाना पड़े तो या तो वह किसी ऐसी जगह जंगल या झाड़ी का सहारा लेते हैं (जहाँ सांप या बिच्छू होने के खतरा रहता है )या शौच को उन्हें शाम तक दबाना पड़ता है। जो उनके सेहत पर  बुरा असर डालता है। अगर महिलाएं शौच के लिए बाहर जाती है तो इससे कई बार छेड़छाड़ या रेप जैसी घटनाएं भी देखने को मिलती हैं। जिस कारण घर की महिलाएं भी बाहर जाने में खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।

 इसे भयउ जानें :-किडनी में होने वाली बिमारी के कारण,लक्षणऔर उससे बचाव कैसे करें

खुले में शौच से नुकसान 

 

खुले में शौच जाने से पर्यावरण तो दूषित होता ही है, साथ ही इसका हमारे जीवन पर भी बुरा असर पड़ता है। शौच पर बैठी मक्खियां जिनके  पैरों पर गंदगी लगा रहता है वे फल और सब्जियां आदि पर बैठ जाती हैं। उनके पैर पर लगी गंदगी फल और सब्जियों पर चिपक कर खाने के रास्ते हमारे शरीर में चली जाती हैं। जिससे हैजा,पेटदर्द ,बुखार आदि हो जाती हैं। यही मक्खियां हमारे शरीर पर भी बैठती हैं, इनके पर लगे गंदगी हमारे रोम छिद्रों के द्वारा हमारे शरीर के अंदर जाकर हमें नुकसान पहुंचाती हैं। इसके अलावा किसी नदी किनारे या अन्य खुली जगह पर शौच जाने उस नदी  तालाब का पानी और आसपास का स्वच्छ वातावरण भी दूषित हो जाता है। इससे तालाब में पलने वाली मछलियां ओर उसमे पानी पिने वाले जानवर भी बीमार हो जाते हैं या मर जाते हैं। इसलिए अपने घर में शौचालय बनवाकर उसका इस्तमाल करें। एक सच्चे और अच्छे नागरिक बनकर पर्यावरण के साथ-साथ अपनी भी स्वच्छता की जिम्मेदारी निभाएं। अगर हम अपने आसपास साफ-सफाई रहेंगे तो इससे हमारा पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा।

इसे भी जानें :-मासिक धर्म के दौरान खास ख्याल रखें !

News Reporter

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.