जानें आर्थराइटिस के कारण,लक्षण और उपचार

बढ़ती उम्र के साथ लोगों को जोड़ो के दर्द, सूजन और अकड़न की समस्या भी बढ़ती जाती है। इन दर्द से बचने के लिए लोग बिना डॉक्टर की सहायता लिए या बिना डॉक्टर के पास गए अपनी मर्जी से कोई भी दवा का सेवन कर लेते हैं या मालिश करके इस दर्द का इलाज करना चाहते हैं। नतीजा यह होता कि हड्डियों के रगड़ से कार्टिलेज डैमेज होता है और धीरे-धीरे यह दर्द हद से ज्यादा पार कर जाता है। जोड़ों का दर्द पहले ज्यदतर 65 के उम्र के लोगों को होता था, लेकिन आजकल 40 से 45 की उम्र के लोगों में भी यह समस्या देखी जाती है। आर्थराइटिस के कई प्रकार हैं लेकिन इनमें से मुख्य हैं ओस्टियो आर्थराइटिस इसमें घुटनों में दर्द, चलने में दिक्कत, उठने-बैठने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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आर्थराइटिस के लक्षण

  •  जोड़ों में दर्द होना या जोड़ों में तिरछापन। इसके अलावा जोड़ों में सूजन और गठिया भी हो सकता है। इसी आपकी चलेगी गति भी कम हो सकती है।
  • इसके अलावा जोड़ों के आसपास लगातार दर्द रहना, चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में दिक्कत हो सकती है। जमीन पर बैठने और उठने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
  • आपके घुटने, कूल्हे, कंधे या पूरे शरीर किसी भी जगह आपको गठिया जैसे दर्द हो सकता है। अगर आपको इनमें से कुछ भी दिक्कत है तो हड्डी रोग विशेषज्ञ से सलाह लेने की आपको जरूरत है। कई बार जोड़ों में परेशानी के कारण पैरों का आकार और चाल ही बदल जाती है। अगर कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

आर्थराइटिस के कारण 

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कैल्शियम की कमी,स्टेरॉयड का लंबे समय तक इस्तेमाल। अधिक तेल, मसाले वाला खाना भी अर्थराइटिस का कारण बन सकता है। बचपन में या किसी भी उम्र में जोड़ों में यदि कोई चोट लगी है तो वो भी उम्र बढ़ने के साथ-साथ जोड़ों के दर्द में बदल जाता है। अगर परिवार  को ये बिमारी पहले से है तो भी इसके होने के चान्चेस बढ़ जाते हैं।

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आर्थराइटिस का इलाज

अर्थराइटिस के इलाज में जोड़ों के अंदर इंजेक्शन लगाते हैं। जिसे ‘विसको सप्लीमेंट्स’ कहते हैं, ऐसे इंजेक्शन से जोड़ों की ऑपरेशन को कुछ वक्त के लिए टाला जा सकता है। मरीज को जोड़ों को कितना नुकसान हुआ है इसकी जांच एक्सरे से की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक मरीज को पेन किलर, कैल्शियम की दवाई और फिजियोथेरेपी दी जाती है। इसके अलावा मरीज को बहुत सी चीजों के परहेज के लिए कहा जाता है। सबसे पहले राजमा, बेसन, टमाटर, उड़द, मसालेदार और अधिक तली-भुनी चीजों से परहेज के लिए कहा जाता है। अगर आप जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो गर्म और खट्टी चीजें खाने से परहेज करें,यह आपके दर्द को और बढ़ाते हैं। डॉक्टर आपको ज्यादा से ज्यादा फल और मौसमी सब्जियां खाने को कहेगा, जिससे शरीर का यूरिक एसिड का स्तर कम हो सके और आपको जोड़ों के दर्द में आराम मिले।

इसके अलावा कई बार डॉक्टर आपको फिजियोथैरेपी भी लेने की सलाह देताहै। जिससे आप बिना दवा के ही आपको जोड़ों के दर्द से मुक्ति मिल सकती है। फिजियोथैरेपी में एक्सरसाइज, हाथों की कसरत,पेन रिलीफ मूवमेंट द्वारा दर्द को दूर किया जाता है। इस थेरेपी से आपका शरीर तरोताजा लगने लगेगा। इसके अलावा आयुर्वेदिक एक्सपर्ट मरीज को तेल से मसाज के अलावा अश्वगंधा, शिलाजीत की दवाई लेने की सलाह देते हैं। आयुर्वेद में आर्थराइटिस का इलाज मिट्टी,जल,अग्नि और जड़ी-बूटियों द्वारा इलाज किया जाता है।

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बचाव ज्यादा बेहतर

अर्थराइटिस से बचने का सबसे सरल उपाय है वजन को कंट्रोल करना। खाने में कार्बोहाइड्रेट और फैट को कंट्रोल रखें। उसमें सब्जियां खाएं। अगर आपको शुरुआत में ही दर्द का एहसास होता है तो, दिनचर्या में एक्सरसाइज को जरूर शामिल करें। अपने जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत बनाएं। इसके अलावा आप रोजाना तैर भी सकते हैं। वजन कम करने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट का वॉक जरूर करें। रोजाना चलेंगे तो इससे आपके हाथ-पैर खुल जाएंगे और जोड़ भी सक्रिय रहेंगे। जोड़ों का दर्द विटामिन ‘डी’ की कमी से होता है, इसलिए कोशिश करें की खाने में ज्यादा से ज्यादा विटामिन ‘डी’ का प्रयोग करें। सर्दियों के समय सुबह का धूप में जरूर सेकें  क्योंकि सुबह की धूप हड्डियों को मजबूत बनाता है। वैसे भी सर्दियों में ही जोड़ों का दर्द बहुत परेशान करता है।

 

News Reporter

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