पेट में दायीं तरफ दर्द अपेंडिक्स हो सकता है,नजर अंदाज ना करें !

अपेंडिक्स पेट के दायीं तरफ बड़ी आंत और छोटी आंत के बीच  में होता है जो इसको जोड़े रखता है। अगर इसमें किसी प्रकार की सूजन आती है तो उसे अपेंडिसाइटिस कहते हैं। अपेंडिक्स शरीर का एक ऐसा अंग है जो वेस्ट है,मतलब इसका कोई यूज़ नहीं है। इसके बगैर भी जिंदगी गुजारी जा सकती है। उपचार के दौरान इस अंग को हटाया भी जा सकता है। अपेंडिक्स की समस्या में अगर थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाए तो ये कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।ये केंचुए के आकर जैसा होता है। इसकी लम्बाई 7 से 10 सेंटीमीटर तक होती है।

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अपेंडिक्स 2 प्रकार के होते हैं

  1. एक्यूट अपेंडिक्स :-ये अपेंडिक्स एकदम होता है, इस अपेंडिक्स का इलाज जितनी जल्दी हो करना चाहिए। यदि अपेंडिक्स में संक्रमण,मल या अन्य किसी चीज की वजह से रुकावट आ जाए तो ये एक्यूट अपेंडिक्स होता है। अगर समय पर इसका इलाज ना किया जाए तो ये फट भी सकता है।
  2. क्रोनिक अपेंडिक्स :-क्रोनिक अपेंडिक्स के बहुत कम मामले पाए जाते हैं। इसमें सूजन एक्यूट अपेंडिक्स के मुकाबले और ज्यादा गंभीर होता है और सूजन भी लम्बे समय तक बना रहता है। कई बार क्रोनिक अपेंडिक्स की पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है। इसका इलाज में लम्बा समय लग सकता है।

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अपेंडिक्स के लक्षण

 

अपेंडिक्स के शुरुआत में पेट में हमेशा दर्द बना रहता है और भूख कम लगती है। लेकिन धीरे-धीरे ये दर्द ज्यादा बढ़ने लगता है। सूजन बढ़कर आंत के आस-पास पहुंच जाता है और उसके कार्य क्षमता को प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में उल्टी और मितली भी हो सकती है।अन्य लक्षण :-

  1.  नाभि के ऊपरी हिस्से में दर्द।
  2. भूख कम लगना ।
  3. गैस सम्बन्धी शिकायत।
  4. शौच में दिक्कत।
  5. पेट में सूजन।
  6. पेशाब में जलन और कभी-कभी खून आना।
  7. चलने में परेशानी।

अपेंडिक्स के कारण

अपेंडिक्स की समस्या तभी उत्पन्न होती है जब छोटी आंत और बड़ी आंत को जोड़ने वाली थैली के रास्ते बंद हो जाते हैं। ये रूकावट अपेंडिक्स के अंदर बलगम जैसा लिक्विट या मल के अंदर चले जाने से होती है। इसके अंदर बलगम या मल कठोर चट्टान के जैसा हो जाता है। इसके अलावा कई बार अपेंडिक्स के ऊतकों में सूजन आ जाती है जिस कारण ये फ़ैल कर इस छेद को बंद कर देते हैं।

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क्यों होती है सूजन

अपेंडिक्स में सूजन 2 कारणों से हो सकता है। पहला इन्फेक्शन के कारण और दूसरा अपेंडिक्स  में कुछ फंसा होने के कारण। आंत के कैंसर की वजह से भी अपेंडिक्स हो सकता है।

अपेंडिक्स में टेस्ट

अपेंडिक्स के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर ब्लड टेस्ट,यूरिन टेस्ट,सोनोग्राफी और C T स्कैन करवा सकता है। जिससे अपेंडिक्स की सही स्थिति की जानकारी मिल सके। अपेंडिक्स की समस्या होने पर बिना देर किये ऑपरेशन करवा लेना चाहिए।

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ऑपरेशन 

अपेंडिक्स का स्थायी इलाज ऑपरेशन ही है क्योंकि ऑपरेशन करके अपेंडिक्स निकाल दी जाती है। डॉक्टर भी जल्द से जल्द ऑपरेशन का ही सुझाव देता है ताकि इसके फटने की सम्भावना खत्म हो जाए। अपेंडिक्स के फटने से इसका इन्फेक्शन पुरे पेट में फ़ैल जाता है, जो कई बार जानलेवा साबित हो सकता है। अपेंडिसाइटृस का ऑपरेशन 2 तरह से होता है।’ओपन सर्जरी‘ और ‘लेप्रोस्कोपिक दूरबीन पद्धति’ द्वारा। लेकिन आजकल लेप्रोस्कोपिक पद्धति ज्यादा प्रचलित है। इसमें छोटे-छोटे चीरों और दूरबीन के साथ स्पेशल उपकरणों के द्वारा ऑपरेशन किया जाता है। ऐसे ऑपरेशन में दर्द कम होता है और निशान भी कम पड़ते हैं। जल्द से जल्द हम अपने सामान्य जिंदगी में लौट सकते हैं। जबकि ओपन सर्जरी में ज्यादा दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है।

किस पद्धति से ऑपरेशन होगा इसका निर्धारण डॉक्टर मरीज की उम्र,शारीरिक स्थिति देखकर करता है। ऐसा देखा गया है की बूढ़े और मोटे लोगों के लिए ओपन सर्जरी सही रहता है। अगर किसी कारण अपेंडिक्स फट गया है,तब भी ओपन सर्जरी की जाती है।

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