ब्रैस्ट कैंसर के टेस्ट और चिकित्सा !

अगर आपको ब्रैस्ट कैंसर वाले लक्षण दिखें या महसूस हो तो, बिना देर किये तुरंत अपने डॉक्टर के पास जायें। पहले तो सिर्फ बड़ी उम्र की महिलाओं को ही ब्रैस्ट कैंसर होता था। लेकिन अब कम उम्र की महिलाओं को भी ये बिमारी होने लगी हैं। स्तन कैंसर है या नहीं ये जानने के लिए कई तरह के टेस्ट होते हैं :-

  • मेमोग्राफी :-मेमोग्राफी एक ऐसा टेस्ट है, जिसमे x-ray के जरिये स्तन की पूरी जाँच की जाती है। इसमें स्तन कैंसर ही नहीं स्तन में गांठ या कोई ट्यूमर का आसानी से पता चल जाता है ।मतलब स्तन से जुड़ी छोटी से छोटी बिमारी का भी पता इस टेस्ट से आसानी से चल जाता है। अगर कोई ऐसी गांठ या ट्यूमर है, जो मेमोग्राफी में अस्पस्ट है या साफ़ नहीं दीखता है तो, इसके लिए आजकल  2d or 3d मेमोग्राफी भी की जाती है। जिससे और ज्यादा आसानी से और एकदम सटीक बिमारी का पता चल सके। 
  • ब्रैस्ट MRI :-स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए स्तन MRI भी किया जाता है। ये इसलिए किया जाता है ताकि ये पता चल सके की कैंसर वाले गांठ का आकार कितना है और इसके आलावा और कोई ट्यूमर तो नहीं है ।
  • बोयोप्सी :-इस टेस्ट में ब्रैस्ट का एक छोटा टुकड़ा या जिसमे कैंसर की आशंका है, उस टुकड़े को निकालकर उसका टेस्ट किया जाता है, की गांठ सामान्य है या कैंसर सम्बंधित है। अगर है तो किस प्रकार का कैंसर है ताकि उसका इलाज आसानी से किया जा सके ।

                                                          ब्रैस्ट कैंसर की चिकित्सा

स्तन कैंसर का इलाज दवाई,कीमोथेरेपी,रेडिएशन थेरेपी और सर्जरी आदि उपायों द्वारा किया जाता है। ये इस बात पर निर्भर करता है की कैंसर किस स्टेज का है !

  • दवाई :-अगर गांठ सामान्य स्टेज में है तो दवाई दी जाती है। इन दवाओं में ऐनास्ट्राजोल,एक्सेमेस्टन और लेस्ट्रोजोल शामिल है। कुछ ऐसी भी गांठ होती हैं जो मासिक धर्म होने के साथ होती हैं और ख़त्म होने के साथ ही ये भी खत्म हो जाते हैं ।दवा हमेशा डॉक्टर के कहने पर ही लें अपने आप नहीं ।
  • सर्जरी :-कैंसर के उपचार में सर्जरी 2 प्रकार की होती हैं (1)  एक तो वो(लम्पेक्टामी) जिसमे स्तन का कुछ हिस्सा निकाल दिया जाता है। स्तन का कितना हिस्सा निकालना है ,ये इस बात पर निर्भर करता है की ट्यूमर कितना बड़ा है या कितना फैला है। (2) दूसरा (मास्टेकटामी)इसमें पूरा का पूरा स्तन ही निकाल दिया जाता है। कभी-कभी तो दोनों स्तनों को निकालने की भी नौबत आ जाती है ।
  • रेडिएशन थेरेपी :-लम्पेक्टामी के बाद पीछे बची कैंसर युक्त कोशिकाओं को नष्ट करने और कैंसर को फिर से होने से रोकने के लिए ये रेडिएशन थेरेपी की जाती है। इस थरेपी के बिना दुबारा कैंसर होने के संभावना 30% तक बढ़ जाती है। सर्जरी के एक महीने ये किया जा सकता है ।
  • कीमोथेरेपी:-अगर मरीज को दुबारा कैंसर होने की या फैलने की सम्भावना है, तो कीमोथेरेपी की जाती है। इस थेरेपी में दवाओं द्वारा इलाज किया जाता है।

कैंसर कोई ऐसी घातक बिमारी नहीं है की जिसका इलाज संभव ना हो। अगर कैंसर का पता चले तो घबराएं नहीं, तुरंत डॉक्टर से मिलकर इलाज शुरू करें। क्योंकि जितनी जल्दी उतना बेहतर सेफ और सस्ता इलाज !

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