ब्रैस्ट फीडिंग है फायेदेमंद! माँ और बच्चे दोनों के लिए

बच्चे के पैदा होने के बाद सबसे पहला आहार माँ का दूध होना चाहिए। डॉक्टर भी इसकी सलाह देते हैं, लेकिन आजकल की अधिकतर माएं ऐसा करने में हिचकिचाती हैं। बच्चे को दूध पिलाने में कहीं शरीर बेडौल ना हो जाये, इसलिए ये मॉडर्न माएं डब्बा का दूध ही बच्चों को पिलाती हैं, लेकिन बच्चे के लिए माँ का दूध ही सबसे ज्यादा फायदेमंद है ।

माँ के दूध में विटामिन और वो पोषक तत्व होते हैं, जो नवजात बच्चे को सबसे ज्यादा जरुरी होता है। बच्चे के जन्म के पहले 6 महीने तक बच्चे को सिर्फ और सिर्फ माँ का दूध ही देना चाहिए। ऐसा नहीं है की स्तनपान सिर्फ बच्चे के लिए ही फायेदेमंद है, इससे फीडिंग करने वाली माँ को भी कई लाभ होते हैं।

ब्रैस्ट फीडिंग या स्तनपान से होनेवाले फायेदे 

  • कई बार बच्चे समय से पहले हो जाते हैं। ऐसे बच्चों का वजन अन्य बच्चों के मुकाबले कम होता है, ऐसे बच्चों को अगर माँ का दूध मिले तो इनका वजन बढ़ जाता है। वे स्वस्थ होने लगते हैं।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं का वजन काफी बढ़ जाता है। ब्रैस्ट फीडिंग ये बढ़ा हुआ वजन कम करने में काफी मदद करता है।
  • माँ के दूध में ऐसे तत्व होते हैं जो बच्चे के मानसिक विकास में अहम् भूमिका निभाते हैं। जो बच्चे जितने ज्यादा समय तक माँ का दूध पीते हैं उनका मस्तिष्क उतना ही विकसित होता है और वे ज्यादा बुद्धिमान होते हैं।
  •  माँ का दूध बच्चे की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढाती है। इसमें एंटीबायोटिक होते हैं, इसके अलावा ये हड्डियों को मजबूत बनाने और उनके विकास में भी सहायक होते हैं।
  • बच्चे को दूध पिलाया जाने वाला बोतल,उसे गर्म करने वाला बर्तन, कई बार अच्छे से साफ नहीं हो पाता, उसमे गन्दगी रह जाती है जो बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में माँ का दूध ही उसे संक्रमण और होने वाले नुक्सान से बचाता है।
  • नवजात बच्चे के शरीर का तापमान कम ज्यादा होता रहता है। माँ का दूध ही बच्चे के शरीर के तापमान को सामान्य बनाये रखने में मदद करता है ।
  • ब्रैस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं को ब्रैस्ट कैंसर की संभावना कम हो जाती है। जिन महिलाओं ने कभी भी स्तनपान ना कराया हो उनमे ब्रैस्ट कैंसर की सम्भावना बढ़ जाता है ।
  • स्तनपान माँ और बच्चा दोनों को ही शुगर,अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाता है। जिनको शुगर होता है उनके खतरे को भी कम करता है। 
  • बच्चे के जन्म के समय उनका शरीर नाजुक रहता है, ऐसे में माँ का दूध आसानी से पाच जाता है और बच्चे को कब्ज की समस्या नहीं रहती।
  • स्तनपान से माँ और बच्चे के बीच भावनात्मक सम्बन्ध बन जाता है, जिससे माँ और बच्चे के बीच का रिश्ता और भी मजबूत होता जाता है ।
  • ब्रैस्ट फीडिंग से महिला को ब्रैस्ट और ओवेरियन कैंसर का खतरा तो कम होता ही है, साथ ही गर्भाशय कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है।
  • डिलीवरी के बाद कभी-कभी महिलाएं बैचेनी महसूस करती हैं, स्तनपान उन्हें इससे निजात दिलाता है।
  • अगर 1 साल से ज्यादा समय तक स्तनपान कराया जाए तो माँ और बच्चे दोनों ही ज्यादा स्वस्थ रहते हैं और इससे ब्रैस्ट की सुन्दरता में भी कोई कमी नहीं आती।

 

News Reporter

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