मौत के मुहँ में जाने से बचें,तम्बाकू आज ही छोड़ें

तम्बाकू के उपयोग से विश्व में हर साल लगभग 60 लोगों की मौतें होती हैं। इसलिए हर साल 31 मई को वर्ल्ड नो तम्बाकू डे के रूप में मनाया जाता है। वर्ल्ड नो तम्बाकू डे को मनाने पीछे ये उद्देश्य है की,लोगों को तम्बाकू से होने वाले दुष्प्रभाव को बताना,ताकि लोग इसका सेवन ना करें। अगर इंडिया की बात की जाए तो यहाँ लगभग 8-10 लाख लोग हर साल सिर्फ तम्बाकू की वजह से मरते हैं। तम्बाकू और धूम्रपान से शरीर में कई प्रकार की घातक बीमारियां और कैंसर होता है। कई लोगों को लगता है की तम्बाकू से ज्यादा खतरनाक धूम्रपान है,लेकिन असल में तम्बाकू शरीर को ज्यादा नुक्सान पहुंचाता है। इसका ये मतलब नहीं की आप तम्बाकू छोड़कर धूम्रपान करना शुरू कर दें।

तम्बाकू में निकोटिन,टार,कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे 28 प्रकार के जहरीले तत्त्व पाए जाते हैं। जो शरीर में कई प्रकार की घातक बीमारियों को जन्म देते हैं। जैसे :हार्ट अटैक,नपुंसकता,गर्भपात,मुहँ का कैंसर,फेफड़े  का कैंसर आदि। सबसे घातक बिमारी कैंसर के होने का मुख्य कारण तम्बाकू और धूम्रपान का सेवन ही है। तम्बाकू एक ऐसा जहर है जो धीरे-धीरे हमारे शरीर को खोखला कर देता है। अगर किसी ने एक बार तम्बाकू का यूज़ कर लिया तो,ये एक लत बन जाती है,जिससे पीछा छुड़ाना बेहद मुश्किल होता है। तम्बाकू से होने वाले दुष्प्रभाव :-

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नपुंसकता को बढ़ावा

तम्बाकू के उपयोग से पुरुष और महिला दोनों का ही प्रजनन क्षमता प्रभावित होता है।तम्बाकू का सेवन करने वाला दम्पति यदि निःसंतान है तो इसके पीछे तम्बाकू की लत जिम्मेदार हो सकता है। तम्बाकू या धूम्रपान का उपयोग करने वाली ज्यादातर महिलाओं का गर्भपात हो जाता है और उनमें बांझपन का खतरा भी बढ़ता है। तम्बाकू के सेवन से पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की कमी आ जाती है,जिस कारण उनमे बच्चे पैदा करने की क्षमता नहीं रहती।

 

कैंसर

तम्बाकू या धूम्रपान के सेवन से कैंसर जैसी बड़ी और खतरनाक बिमारी होती है। चाहे वो मुहं का कैंसर हो या फेफड़े का या अन्य कोई इनके लिए काफी हद तक तम्बाकू जिम्मेदार होता है। लोग तम्बाकू या धूम्रपान स्टाइल,स्टेटस या फैशन केलिए शुरू तो करते हैं ये कब उनकीं लत बन जाती है पता नहीं चलता। पहले लोग तम्बाकू पीते थे फिर तम्बाकू लोगों को पीने लगता है। तम्बाकू पैकेट के बाहर खतरे के निशान को देखकर भी लोग इसे पीने से बाज नहीं आते। उल्टे पैसे देकर इस बिमारी को घर ले आते हैं।

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मुहँ की बिमारी

तम्बाकू के ज्यादा सेवन से मुहँ से सम्बंधित बिमारी सबसे ज्यादा होती है। इसके सेवन से मुहँ का कैंसर तो होता ही है,साथ भी मुहँ से बहुत ज्यादा दुर्गन्ध आती है।जिससे सामने वाले पर गलत प्रभाव पड़ता है। तम्बाकू के ज्यादा यूज़ से धीरे-धीरे मुहँ में लार की कमी हो जाती है।  जिससे खाना सही से नहीं पच पाता। लार खाना पचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। लोग तम्बाकू होठ के निचे दबाते हैं,जिससे दाँत धीरे-धीरे पीले,मैले और काले होने लगते हैं।साथ ही दाँत कमजोर भी हो जाते हैं। दाँत सड़ना और मसूड़े का खराब होने के पीछे भी तम्बाकू का ही हाथ है। इसके उपयोग से शरीर बूढ़ा और कमजोर दिखाई देता है।

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तम्बाकू के उपयोग से शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव

तम्बाकू शरीर को समय से पहले कमजोर कर देता है। चेहरे पर उम्र से पहले झर्रियां दिखायी देने लगती हैं।तम्बाकू से सेवन से शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घट जाती है और बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है। इसके उपयोग से लकवा,टीबी आदि बिमारी हो सकता है।

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