वर्ल्ड डायबिटीज डे :-बच्चों में बढ़ता खतरा

हर साल 14 नवंबर को ‘वर्ल्ड डाइबिटीज डे ‘ मनाया जाता है। मिठाइयों का नाम सुनते ही बहुत से लोगों के मुंह में पानी आ जाता है।वे मीठा पसंद होने के कारण मिठाई दबा के खाते भी हैं, लेकिन यह मिठाई हमारे शरीर को अच्छा खासा नुकसान भी पहुंचाता। हैइंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार दुनिया भर में 40 से ज्यादा लोग डायबिटीज के शिकार हैं। भारत में 2017 तक 7 करोड़ 30 लाख लोग इससे पीड़ित थे,जिसकी संख्या अब बढ़ चुकी होगी। अगर इसी तरह डाइबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ती रही तो 2050 तक लगभग 15 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। बड़ों के साथ-साथ बच्चे भी डाइबिटीज के शिकार हो रहे हैं।एक सर्वेक्षण द्वारा जारी किए गए आंकड़ों की माने तो भारत के लगभग 10% बच्चों में प्रीडायबिटीज पाया जाता है। खराब लाइफस्टाइल और खानपान में कमी की वजह से बच्चों में टाइप-1  और टाइप-2 का खतरा बढ़ता जा रहा है। डायबिटीज बच्चों की आंखों और किडनी में सबसे ज्यादा बुरा असर डालते हैं।

बच्चों में डाइबिटीज होने के कारण

बच्चों में डायबिटीज होने का मुख्य कारण फास्टफूड का ज्यादा सेवन करना है। आजकल बच्चों की थाली से फल और सब्जियां दूर होती जा रही हैं। जिस कारण बच्चे डाइबिटीज के शिकार हो रहे हैं। जिन बच्चों के परिजनों में पहले से कोई डायबिटिक है, उनके माता-पिता, दादा-दादी को डायबिटीज है तो उन्हें भी इस समस्या से गुजरना पड़ सकता है। जिन बच्चों का इम्यूनो सिस्टम कमजोर हो ऐसे बच्चे डाइबिटीज के  शिकार हो सकते हैं। त्योहारों के सीजन में हमारे यहां खूब मिठाई खाई जाती है और लगभग हर त्यौहार में मिठाई खिलाकर ही एक दूसरे को शुभकामनाएं दी जाती हैं। इस समय बच्चों को भी नहीं रोका जाता। इसलिए भी बच्चे बहुत ही आसानी से डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। शहरी जीवन शैली में जंक फूड का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है। जिसमें बहुत ज्यादा हाई कैलोरी और फैट की मात्रा होती है। ये जंक फूड बच्चों की सेहत पर तो बुरा असर डालती हैं, साथ ही उनके पाचन तंत्र को भी कमजोर बनाते हैं।

डाइबिटीज के लक्षण 

डायबिटीज में बच्चों का शुगर लेवल बढ़ने के कारण उन्हें बहुत ज्यादा भूख और प्यास लगती है। बच्चे थके हुए महसूस करने लगते हैं और वह बहुत ही कम शारीरिक गतिविधियों में नजर आते हैं। यदि बच्चों को कोई चोट लग जाए तो जख्म जल्दी नहीं भरता है। डायबिटीज से आँखों और पाचन तंत्र पर भी बुरा असर डालती है। इसमें आँखों पर धुंधलापन होकर कम दिखाई देने लगता है।

डाइबिटीज से बचाव

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसका पूरी तरह इलाज नहीं किया जा सकता। सिर्फ इसके असर को कम किया जा सकता है। अगर बच्चों में डायबिटीज है तो ऐसे बच्चों को इंसुलिन की थैरेपी दी जाती है। अगर जांच में बच्चों में डायबिटीज पाया जाता है तो जितनी जल्दी हो सके उसका सही तरीके से इलाज करना शुरू कर दें। उसके खान-पान का विशेष ध्यान रखें। उसके भोजन में कहीं जंक फूड, चॉकलेट आदि ना हो। इसके बजाय खाने में फ्रूट्स, फल का जितना ज्यादा हो सके बच्चों को खाने को दें। बच्चों के खाने में सलाद ,दालें आदि प्रोटीन युक्त चीजें जरूर शामिल हो। बच्चों को समय पर भोजन करने की आदत डालें, साथ ही उसके खाने में पौष्टिक आहार का ज्यादा से ज्यादा मात्रा हो। शुगर, मिठाई,मैदे वाली रोटी, चॉकलेट्स आदि चीजों से जितना हो सके बच्चों को दूर रखें। बच्चों को नियमित रूप से आउटडोर गेम और शारीरिक एक्टिविटीज करने के लिए प्रोत्साहित करें।  बच्चे का वजन ज्यादा है तो उसे काम करने में उसकी मदद करें।

 

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