वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे-जाने इसके कारण ,लक्षण और बचाव

हेपेटाइटिस एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है। हेपेटाइटिस के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए, दुनिया भर में हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मनाया जाता है। टीबी  के बाद हेपेटाइटिस दुनिया का सबसे बड़ा संक्रामक रोग है। हेपेटाइटिस से हर साल लगभग 14 लाख लोगों की मौत हो जाती है। दुनिया में अभी भी 80% ऐसे लोग हैं जो हेपेटाइटिस के जांच और इलाज से दूर हैं। ऐसे मामलों में कमी लाने और लोगों को जागरूक करने के लिए डब्ल्यूएचओ हर साल हेपेटाइटिस डे मनाता है। 2019 में हेपेटाइटिस डे की थीम “इन्वेस्ट इन इलिमिनेटिंग” रखा गया है। जिसका मतलब है “हेपेटाइटिस को खत्म करने के लिए निवेश की जरूरत है“। इस बीमारी से आमतौर पर लीवर में सूजन आ जाती है।

हेपेटाइटिस होने के कारण

हेपेटाइटिस एक संक्रामक बीमारी है। हेपेटाइटिस होने का प्रमुख कारण इन्फेक्शन है। हेपेटाइटिस से लीवर में सूजन हो जाती है। हेपेटाइटिस दूषित भोजन खाने या दूषित पानी पीने से होता है। इसके 5 वायरस होते हैं ‘ए’,’बी’,’सी’,’डी’ और इ।

  • इसके वायरस दूषित खान-पान या दूषित पानी के इस्तेमाल करने से शरीर में पहुंचते हैं।
  • हेपेटाइटिस के मामले गर्मी और बरसात के मौसम में ज्यादा सामने आते हैं,क्योंकि इस मौसम में पानी काफी दूषित हो जाता है।
  • अत्यधिक शराब पीने के कारण भी यह रोग हो सकता है,इसके चलते लिवर में गड़बड़ी हो जाती है।
  • इन सब में सबसे खतरनाक टाइप ‘बी’ और ‘सी’ है, इससे लिवर सिरोसिस और कैंसर होने का खतरा रहता है। अगर इसका शुरुआती दौर में इलाज ना किया जाए तो व्यक्ति की मौत भी हो सकती है।
  •  कुछ दवाइयां ऐसे भी हैं जिनके ज्यादा इस्तेमाल से लीवर खराब हो जाता है, इससे लीवर में सूजन बढ़ जाता है।

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हेपेटाइटिस के लक्षण

  •  भूख ना लगना या कम लगना।
  • जी मिचलाना, पीलिया या बुखार होना।
  • लीवर का आकार बढ़ना।
  • पेशाब में पीलापन आना और त्वचा में पीलापन आना,आँखों का रंग भी पीला हो जाना।
  • अगर रोग गंभीर हो जाए तो मरीज के नाक से खून निकल सकता है।
  • वजन का घटना।
  • बिना मेहनत के थकान लगना।

हेपेटाइटिस वायरस के लक्षण दिखते ही हेपेटोलॉजिस्ट से मिलें और जांच कराएं। टेस्ट में पेट का अल्ट्रासाउंड और लिवर बायोप्सी कराने की सलाह दी जाती है। जिससे यह पता चले कि आपका हेपेटाइटिस कितना पुराना है,ताकि उसी के अनुसार इलाज हो सके।

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हेपेटाइटिस का इलाज

हेपेटाइटिस भले ही एक संक्रामक रोग है, लेकिन इसका भी इलाज संभव है। पिछले कुछ समय तक मार्केट में केवल हेपेटाइटिस ‘बी’ के लिए ओरल दवाएं ही मिल रही थी, जबकि हेपेटाइटिस ‘सी’ का इलाज इंजेक्शन से होता था। लेकिन अब हेपेटाइटिस ‘सी’ की ओरल दवाएं भी मार्केट में उपलब्ध हैं।  यह इंजेक्शन के तुलना में ना सिर्फ सस्ती है, बल्कि 90% तक कारगर भी है। यह दवाएं भारत में भी मौजूद हैं। जरूरत पड़ने पर अनेक मरीजों को एंटीवायरल दवाएं कई सालों तक भी लेनी पड़ती है। यह आपके हेपेटाइटिस के पुराने होने पर निर्भर करता है।

 

हेपेटाइटिस से बचाव

  • इससे बचने के लिए सड़क किनारे लगी दुकानों पर मिलने वाले फास्ट फूड खाने से बचें।
  • अपने स्किन का खास क्या रखें खासकर बारिश के दिनों में।
  •  किसी संक्रमित व्यक्ति की चीजों का इस्तेमाल करने से बचें और संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित शारीरिक संबंध ना बनाएं और ना ही संक्रमित व्यक्ति का कोई चीज इस्तेमाल करें।
  • गर्भवती महिलाओं को खासकर हेपेटाइटिस ‘बी’ की जांच के साथ ही टिका लगवा लेना चाहिए,क्योंकि नवजात बच्चे को भी जन्म के बाद हेपेटाइटिस ‘बी’ का खतरा रहता है।
  • अगर गर्भवती महिला हेपेटाइटिस ‘बी’ से पीड़ित है तो, उसके होने वाले बच्चे को भी हेपेटाइटिस होने का खतरा रहता है। जरुरी है की इसकी रोकथाम पहले की जाए।

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क्या खाएं

खाने में हरी सब्जियां, पपीता, सलाद, नारियल पानी, टमाटर, अंगूर, मूली, ब्राउन राइस, बदाम आदि को अपने डाइट में शामिल करें। हरी सब्जियों को बनाने से पहले अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें क्योंकि बरसात के दिनों में इनमे धूल मिट्टी में ज्यादा मिल जाती है। मेवा, दही, अंडे, चिकन आदि का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा ग्रीन टी, दूध, दही, पनीर,लहसुन, चुकंदर को भी अपने डाइट में शामिल करें।

क्या ना खाएं

अधिक गर्म चीजें तेल और मसाले से बनने वाली चीजें। सड़क पर मिलने वाले फास्ट फूड, अल्कोहल लेने से बचें। आलू के चिप्स, मक्खन, ज्यादा मीठा और मलाई युक्त दूध, चीनी, नमक, आधा पका हुआ भोजन, जंक फूड आदि से भी जितनी दुरी बना लें उतना ही अच्छा।

News Reporter

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