हर 15 में से 1 भारतीय की मौत का कारण कैंसर

हर साल 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है। वर्ल्ड कैंसर डे के दिन ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ ने कैंसर से संबंधित नए आंकड़े जारी किए हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार हर 10 में से 1 भारतीय को कैंसर होने की संभावना है और हर मरने वाला 15 में से 1 की मौत का कारण कैंसर होगा। ‘WHO’ का ये रिपोर्ट जारी करने का मकसद लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक करना है। उसके अनुसार कम विकसित और सीमित स्वास्थ्य सेवा वाले देश में कैंसर जैसी बीमारी घातक रूप ले सकता है।

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में कैंसर से लगभग 7,84,000 मौतें हुई थी। कैंसर से मरने वाले महिलाओं में सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर और पुरुषों में मौत का कारण ओरल कैंसर पाया गया है। ओरल कैंसर का मुख्य कारण बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू आदि का प्रयोग करना है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार अगले 20 वर्षों में कैंसर से दुनिया भर में होने वाली मौतों की संख्या का आंकड़ा 60 % हो सकता है। इसमें ज्यादातर विकासशील और सीमित स्वास्थ्य संसाधन वाले देश हो सकते हैं क्योंकि दुनिया भर में धूम्रपान करने वाले 80 % लोग इन्हीं देशों से आते हैं। इसके अलावा महिलाओं में मोटापा, एक जगह बैठकर ऑफिस में काम करना, फिजिकल एक्टिविटी का कम होना आदि की वजह से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और गर्भाशय का कैंसर का कारण बनते हैं।

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महिलाओं में कैंसर के मामले 

  1. ब्रेस्ट कैंसर – 162,500 

  2. ओरल कैंसर – 120,000 

  3. गर्भाशय का कैंसर – 97,000 

  4. फेफड़ों का कैंसर – 68,000 

  5. पेट का कैंसर – 57,000 

  6. मलाशय का कैंसर – 57,000

पुरुषों में कैंसर के मामले

  1. ओरल कैंसर – 92,000 

  2. फेफड़ों का कैंसर – 49,000 

  3. पेट का कैंसर – 39,000 

  4. मलाशय कैंसर – 34,000 

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पुरुषों में कैंसर के कारण

एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में बढ़ते कैंसर का मुख्य कारण धूम्रपान करना है। यह ज्यादातर चीन, भारत और इंडोनेशिया में रहने वाले लोगों में पाया गया। दुनिया भर के  50 % स्मोकिंग करने वाले लोग चीन, भारत और इंडोनेशिया से आते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में  6.9 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं और 4.2 करोड़ लोग तंबाकू चबाते हैं। इनमें से ज्यादातर लोग मध्यम और निम्न आय वाले लोग हैं, जो अपनी परेशानी दूर करने और मनोरंजन के लिए धूम्रपान और तंबाकू जैसी बेकार की चीजों का इस्तेमाल करते हैं। जिस कारण मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों में इस तरह का कैंसर का खतरा आम हो रहा है।

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महिलाओं में बढ़ता ब्रेस्ट कैंसर

एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर के मामले 1.4 -2.4 की दर से बढ़ रहे हैं।ब्रेस्ट कैंसर गांव के मुकाबले शहरों में ज्यादा सक्रिय है क्योंकि शहर की महिलाएं अपनी सुंदरता बनाए रखने के लिए जितना कम हो बच्चे को स्तनपान कराती हैं। उनका मानना है की ज्यादा स्तनपान से सुंदरता और ज्यादा दिनों तक जँवा नहीं रह सकते। जिस कारण वे अपने बच्चों को बहुत कम स्तनपान कराते हैं। स्तनपान कराने वाली है महिलाओं की अपेक्षा स्तनपान ना कराने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के ज्यादा मामले देखे गए हैं। इस कारण शहरी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और ओवेरियन कैंसर आदि का खतरा ज्यादा पाया जाता है। इसके लिए महिलाओं को समय-समय पर अपने  कैंसर की जांच और मेमोग्राफी कराते रहना चाहिए। 30 से ज्यादा उम्र की महिलाओं को हर 6 महीने में अपना मेमोग्राफी जरूर कराएं। इससे महिलाओं को कैंसर है या नहीं और है तो किस स्टेज में है की जानकारी मिल जायेगी। ताकि अगर कैंसर शुरुआती स्टेज में है तो इसका इलाज जितनी जल्दी संभव हो शुरू हो सके और इसे बढ़ने से रोका जा सके। आप एक लंबी और स्वस्थ जिंदगी जी सकें।

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शहर हो या गाँव दोनों ही जगह कैंसर के बढ़ते मामले

शहर हो या गांव कैंसर के मामले दोनों ही जगह समान पाए जाने लगे हैं। पहले जहां गांव में ऐसी खतरनाक बीमारियों के बहुत कम मामले आते थे।वहीँ अब कैंसर गांव में भी आम हो गया है। इसी तरह शहर में रहने वाले लोग हाई सोसाइटी जिंदगी जीने वाले होते हैं। इन शहरी लोगों में ब्रैस्ट  कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका कारण ऑफिस में देर तक एक जगह बैठकर काम करना,कम मेहनत वाले काम करना, जंक फूड का सेवन ज्यादा करना, मोटापे का शिकार, शारीरिक मेहनत ना के बराबर करना आदि गंभीर बीमारियों के साथ-साथ कैंसर का कारण भी बनता है।

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